Kya Dekhte Ho Surat Tumhari Lyrics in Hindi

Song : Kya Dekhate Ho Surat Tumhari
Movie : Qurbani (1980)
Singer : Asha Bhosle, Mohammed Rafi
Lyricist : Indeevar

kya dekhate ho
kya dekhte ho
surat tumhari

kya chahate ho
chahat tumhari
na ham jo kah de
kah na sakogi
lagati nahi theek niyat tumhari
kya dekhate ho
surat tumhari
kya chahate ho
chahat tumhari
na ham jo kah de
kah na sakogi
lagati nahi thik niyat tumhari
kya dekhate ho surat tumhari

roz roz roz roz dekhu tujhe
nai nai lage mujhe ango me amrit ki dhara
tere ango me amrit ki dhara
dil lene ke dhang tere
baato ka andaz pyara
teri baato ka andaz pyara
shararat se chahara chamakane laga kyo
shararat se chahara chamakane laga kyo
ye rang lai hai sagat tumhari
kya dekhate ho surat tumhari

socho zara socho zara jane jigar bitegi kya
tumpe agar hamko jo koi chura le
tumse hamko jo koi chura le
kisine jo tumhe chhina namumkin hai
usaka jinaa kaise nazar koi dale
tumape kaise nazar koi dale
pyar pe apane
itana bharosa
pyar pe apane
itana bharosa
itana mohabbat me fitrat hamari
kya dekhate ho
surat tumhari
kya chahate ho
chahat tumhari
na ham jo kah de
kah na sakogi
lagati nahi thik niyat tumhari
kya dekhate ho
surat tumhari

क्या देखते हो
क्या देखते हो
सूरत तुम्हारी
क्या चाहते हो
चाहत तुम्हारी
ना हम जो कह दें
कह न सकोगी
लगती नहीं ठीक नियत तुम्हारी
क्या देखते हो
सूरत तुम्हारी
क्या चाहते हो
चाहत तुम्हारी
ना हम जो कह दे
कह न सकोगी
लगती नहीं ठीक नियत तुम्हारी
क्या देखते हो
सूरत तुम्हारी

रोज़ रोज़ रोज़ रोज़ देखूं तुझे
नई नई लगे मुझे अंगो में अमृत की धारा
तेरे अंगो में अमृत की धारा
दिल लेने के ढंग तेरे
सीखें कोई रंग तेरे
बातो का अंदाज़ प्यारा
तेरी बातो का अंदाज़ प्यारा
शरारत से चहरा चमकने लगा क्यों
शरारत से चहरा चमकने लगा क्यों
ये रंग लाइ है संगत तुम्हारी
क्या देखते हो सूरत तुम्हारी

सोचो ज़रा सोचो ज़रा जाने जिगर बीतेगी क्या
तुम पे अगर हम को जो कोई चुरा ले
तुमसे हमको जो कोई चुराले
किसी ने जो तुम्हे छीना नामुमकिन हैं
उसका जीना कैसे नज़र कोई डाले
तुम पे कैसे नज़र कोई डाले
प्यार पे अपने
इतना भरोसा
प्यार पे अपने
इतना भरोसा
इतना मोहब्बत में
फितरत हमारी
क्या देखते हो
सूरत तुम्हारी
क्या चाहते हो
चाहत तुम्हारी
न हम जो कह दे
कह न सकोगी
लगती नहीं ठीक नियत तुम्हारी
क्या देखते हो
सूरत तुम्हारी

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